रायपुर.
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने गृह निर्माण मंडल को राजनांदगांव के दो आवंटियों की जमा राशि ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने मंडल को ₹21,83,567 की मूल राशि पर 19 फरवरी 2019 से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने को कहा है।
इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए ₹50 हजार मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹20 हजार भी देने होंगे। सभी भुगतान आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग का यह फैसला अटल विहार आवास योजना से जुड़ा है, जहां आवंटियों ने मकान के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आवंटन रद्द करने और अपनी जमा रकम वापस मांगी थी। आयोग ने माना कि योजना की शर्तों के तहत ब्याज सहित राशि लौटाने का प्रावधान होने के बावजूद रकम वापस नहीं करना सेवा में कमी है।
मकान के निर्माण से संतुष्ट नहीं थे आवंटी
मामला गीता शुक्ला और निर्मल शुक्ला की शिकायत से जुड़ा है। दोनों ने गृह निर्माण मंडल की अटल विहार योजना, पेंड्री, राजनांदगांव के अंतर्गत स्व-वित्तीय योजना में जूनियर एमआईजी टाइप-1 भवन लेने के लिए 18 जुलाई 2012 से लेकर 31 जनवरी 2018 तक अलग-अलग 5 किस्तों में कुल ₹21,83,567 जमा किए थे। उनका आरोप था कि मकान का निर्माण तय मानकों के मुताबिक नहीं हुआ और शिकायत करने के बाद भी उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। इसके बाद दोनों आवंटियों ने मकान का आवंटन निरस्त करने की मांग की। साथ ही, योजना की शर्तों के अनुसार जमा रकम ब्याज सहित वापस करने का अनुरोध किया। मामले में संबंधित संपदा प्रबंधक, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, राजनांदगांव को विपक्षी पक्ष बनाया गया था।
गृह निर्माण मंडल ने ब्याज देने का किया था विरोध
मंडल ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आवंटित मकान का निर्माण पूरा हो चुका था और आवंटियों को उसका कब्जा लेने के लिए भी कहा गया था। मंडल के मुताबिक, आवंटियों की ओर से रेरा, रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण और अन्य उपभोक्ता मंचों पर कार्यवाही किए जाने के कारण मामला लंबित रहा। मंडल ने यह तर्क भी दिया कि आवंटन के नियमों के तहत निरस्तीकरण की स्थिति में निर्धारित कटौती के बाद ही जमा रकम लौटाई जा सकती है। उसके अनुसार, इस स्थिति में ब्याज देने का प्रावधान नहीं था और आवंटी 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के हकदार नहीं थे।
योजना की शर्तों को माना फैसले का आधार
राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान योजना की शर्तों को अहम माना। आयोग के मुताबिक, नियमों में स्पष्ट प्रावधान था कि यदि हितग्राही मकान के निर्माण कार्य या किए गए सुधारों से संतुष्ट नहीं है और आवंटन रद्द किया जाता है, तो जमा राशि 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाई जाएगी। आयोग ने यह भी पाया कि आवंटियों की ओर से लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद मंडल ने उनकी रकम वापस नहीं की। बाद में संबंधित मकान किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया, लेकिन मूल आवंटियों की जमा राशि का भुगतान नहीं किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब योजना के नियम ही जमा रकम पर ब्याज देने का अधिकार देते हैं, तो वैध आवेदन के बाद भी भुगतान नहीं करना सेवा में कमी के दायरे में आता है। इसी आधार पर आवंटियों को उनकी जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया।
2019 से ब्याज, मुआवजा और वाद खर्च भी देना होगा
राज्य आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में गृह निर्माण मंडल को कुल चार वित्तीय दायित्व पूरे करने के निर्देश दिए हैं। इनमें ₹21,83,567 की मूल जमा राशि लौटाना, 19 फरवरी 2019 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देना, मानसिक कष्ट और उत्पीड़न के लिए ₹50,000 की क्षतिपूर्ति तथा ₹20,000 का वाद खर्च शामिल है। आदेश के मुताबिक, मंडल को सभी देय रकम का भुगतान 30 दिनों के भीतर करना होगा।

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